मंगलवार, 10 अगस्त 2010

दिल्ली में विकाश के नाम पर खुलेआम लूट और जनता के पैसे क़ी बर्बादी के सबूत...क्या PMO और CVC दोषियों के खिलाप करेगा कार्यवाही ...

इस देश में विकाश के नाम पर ढोंग और जनता के पैसों की बर्बादी देखनी है तो दिल्ली में घुमते वक्त अपनी नजरें और दिमाग खुला रखिये ,हर तरफ आपको जनता के पैसों की बर्बादी और विकाश के नाम पर लूटने का धंधा चलता दिखेगा ,लेकिन ये लूट सरकार और सरकारी जाँच एजेंसियों को नहीं दिखती है | PMO और CVC को इसके लिए विशेष अभियान चलाने की जरूरत है अगर वह वाकई जनता के पैसों के लूट को रोकना चाहती है |

आइये हम दिखाते है आपको ....
ये दिल्ली के नरेला के उस सड़क का दृश्य है जिसे सिर्फ इसलिए बनाया गया जिससे कड़ोरो रुपया लूटा जा सके | सबसे पहले तो इस सड़क क़ी अभी कोई जरूरत नहीं थी इस सड़क से दिन भर में शायद ही कोई एक-आध मोटरसाइकिल वाला भी जाता हो | ये सड़क है है नरेला से सिंघु बोर्डर जाने वाली सड़क और नरेला औद्योगिक क्षेत्र से जी .टी करनाल रोड को बेवजह जोडती लिंक रोड | ऐसे कई लिंक रोड हैं जिनकी अभी दस साल कोई जरूरत नहीं थी लेकिन यह इसलिए बनाये गए क़ी इनका उपयोग तो होगा नहीं जिससे घटिया स्तर का बना कर कड़ोरों क़ी लूट खसोट क़ी जा सके ,इस सड़क का अगर प्रयोग होता तो दो महीने बाद इस सड़क का बुड़ा हाल होता | 

इस देश में स्कूल खोलने के लिए पैसे नहीं हैं , एक मकान जिसमे शौचालय भी हो को बनाकर गरीबों को मुफ्त में दिया जाय इसके लिए देश का खजाना खाली है ,लोगों को तरह-तरह के टेक्स क़ी मार को झेलने के लिए मजबूर किया जाता है ,हवाला दिया जाता है वित्तीय घाटे का | जब बिना वजह जनता के पैसों को इस तरह बिना जरूरत के सड़कों पे लगाकर लूटा जायेगा तो घाटा जनता का खून चूसने के बाद भी पूरा नहीं होगा | जरूरत है ऐसे फिजूल के निर्माण के लिए धन क़ी अनुशंसा करने वाले अधिकारी पे आपराधिक लापरवाही के कार्यवाही क़ी |

ऐसे कई लिंक रोड हैं जो बेवजह जनता के धन के बर्बादी क़ी दर्दनाक दास्ताँ कहतें है ,कोई भी जाँच अधिकारी अगर इन पर हुए फिजूल के खर्चों और घटिया निर्माण के पीछे के लूट क़ी कहानी क़ी जाँच करेगा तो कई सफेदपोश कुकर्मी इस जाँच में फंस सकते हैं और उनसे कड़ोरों के धन क़ी वापसी भी सरकार को हो सकती है ,लेकिन अगर कोई जनता के धन क़ी बर्बादी क़ी जाँच करना चाहे तब  ...?  यही नहीं यहाँ वर्षों से DDA ने सैकड़ों एकड़ जमीन को अधिग्रहण तो कर लिया है लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं कर पा रही है क्योंकि दस साल पहले बने कई फ्लेटों का भी आवंटन ड्रा द्वारा अभी होना बांकी है ,शर्मनाक है DDA की कार्यप्रणाली ,जिससे कृषि योग्य जमीन का बिना वजह ही दुरूपयोग हो रहा है |

अब देखिये ये एक और शर्मनाक नजारा ,एक तरफ तो फिजूल क़ी सड़क और दूसरी तरफ ये है नरेला औद्योगिक क्षेत्र के मुख्य सड़क का हाल ,जिसमे सड़क में गड्ढा है या गड्ढे में सड़क इसका पता लगाना मुश्किल है ,जबकि इस सड़क पर हजारो मजदूर अपनी रोजी-रोटी के लिए रोज चलते हैं ,सैकड़ों गाड़ियाँ सामान के आदान प्रदान के लिए रोज दौडती है | जिन सड़कों के निर्माण और रखरखाव की सख्त जरूरत है उसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है और जिन सड़कों की जरूरत नहीं थी उन पर सैकड़ों कड़ोर रुपया खर्च कर दिया गया | जनता परेशान लूटेरे मालामाल ..?

पूरे नरेला औद्योगिक क्षेत्र का इतना बुरा हाल है क़ी पूछिए मत | ये है विकाश  क़ी कहानी जहाँ जरूरत है वहाँ सड़क नहीं और जहाँ कोई जरूरत नहीं वहाँ लम्बी चौरी सड़कें विकाश को दर्शाती या विकाश के नाम पर लूट क़ी कहानी के सबूत देती है | पैसे की बर्बादी का तो ये नमूना है | सरकारी नीतियाँ ,जमीनी जरूरत के अनुसार विकाश के बीच ईमानदारी भरा संतुलन का अभाव और किसी निगरानी व्यवस्था का ना होना देश के विकाश को  ढोंग की ओर ले जा रही है ,जनता टेक्स दे-दे कर लुट रही है और देश के विकाश के नाम पर लूटेरे देश को लूट रहें हैं | देश की राजधानी का ये हाल है तो देश के दूर दराज का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है |

3 टिप्‍पणियां:

  1. bahut khoob sir aap to bilkul reporter ban gaye. wah sir sat sat naman aapki des bhakti ke jajbe ko.

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  2. Sab ke sab beimaan hai sir ji........Chor hai.

    aur aapne inki chori ke baare men saboot ke saath likha hai..isliye aap bane
    BHARAT REPOERTER. BADHAAI.

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  3. आपने बिल्कुल सही लिखा है पर इस तरह की समस्यायों का समाधान क्या है एक आम आदमी क्या कदम उठा सकता है

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